सेब सीजन शुरु हाेते ही बागवानाें की मेहनत पर फिर रहा पानी

काेराेना संकट के बीच इस बार बागवानाें पर दाेहरी मार पड़ रही है। सेब काे मंडियाें तक जैसे-तैसे पहुंचाने के लिए बागवानाें ने हर संभव प्रयास किए, लेकिन सीजन शुरु हाेते ही सेब पर सन बर्न ने प्रहार कर दिया । जिला किन्नौर के मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्राें में इन दिनों सेब सीजन चरम सीमा पर हैं, मगर अगस्त और सितम्बर महीने में बारिश न हाेने से सेब पर ग्रहण लग चुका है। जिन क्षेत्राें में सेब की अच्छी फसल हैं वहीं पर ही सन बर्न ने बागवानाें की मेहनत पर पानी फेर दिया ।

बागवानी विशषज्ञ के मुताबिक सेब पर सन बर्न का काेई इलाज नहीं हैं। इसके लिए अगस्त या सितम्बर के महीने में बारिश ही काफी थी। बताया गया की सेब तुड़ान से 15 दिन पहले कैल्शियम क्लाेराइड का छिड़काव भी कर सकते हैं, मगर उसके लिए मिडल बेल्ट में समय हाे चुका है।

फ़िलहाल इसका काेई इलाज नहीं: डा. भारद्वाज

बागवानी विशेषज्ञ डा. एसपी भारद्वाज ने बताया कि सेब में लगने वाली सन बर्न बीमारी का काेई इलाज नहीं हैं। उन्हाेंने बताया कि बारिश न हाेने और हवा में कम नमी के कारण ही ऐसी बीमारी पैदा हाे गई है। यह बागवानाें के लिए गंभीर मसला है। डा. एसपी भारद्वाज की माने ताे सेब तुड़ान से 15 दिन पहले कैल्शियम क्लाेराइड का स्प्रे कर सकते हैं, लेकिन ऐसा समय पर करना हाेगा। उन्हाेंने बताया कि सूरज की किरणे सीधी सेब पर पड़ने और बारिश न हाेने से सेब पर सन बर्न की बीमारी लग गई है।

किन्नौर में 33 लाख सेब की पेटियाें का अनुमान

जिला किन्नौर में इस बार लगभग 33 लाख सेब की पेटियों का अनुमान है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक कल्पा उपमंडल में इस वर्ष लगभग 14 लाख 35 हजार 800 बाॅक्स बनेंगे। निचार उपमंडल में लगभग छह लाख सात हजार पांच साै सेब बाॅक्स तैयार हांेगे, जबकि पूह उपमंडल में 12 लाख 40 हजार सेब बाॅक्स देश की विभिन मंडियाें तक पहुंचेंगे। बताया गया की इस बार सितम्बर महीने अब तक करीब 10 लाख पेटियां मंडयाें तक पहुंच चुकी है।

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