Friday, 23 October 2026Fri, 23 Oct 2026
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हिमाचल शिक्षा देने में आगे, रोजगार देने में फिसड्डी

HLP

भारत में शिक्षित बेरोजगार युवाओं का आंकड़ा कई करोड़ पहुंच गया है। देश का ऐसा कोई राज्य नहीं है,जहां शिक्षित बेरोजगार युवा वर्ग रोजगार की तलाश में दर-दर की ठोकरें नहीं खा रहा है। जबकि विश्व में भारत ही ऐसा देश हैं,जहां 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम युवाओं की है। देश में बढ़ रही बेरोजगारी की समस्या को दूर करने के लिए अब रोजगार को मौलिक अधिकार में शामिल करने तथा रोजगार आयोग का गठन किया जाना अनिवार्य है।

यह बात पूरे देश में यूथ फॉर राइट टू एम्प्लॉयमेंट अभियान चला रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र नेताओंं ने हिमाचल विश्वविद्यालय शिमला में आयोजित बैठक के दौरान कही। इस मौके पर दिल्ली विवि के छात्र नेता लक्षणम यादव ने कहा कि आज पुरे देश में बेरोजगारी बहुत बड़ा मुद्दा है इस मुद्दे पर किसी भी पार्टी की सरकार गंभीरता से कार्य नहीं कर रही है।

उन्होंने कहा कि इस अभियान को पिछले एक साल से पुरे देश में चलाया गया है। यूथ फॉर राइट टू एम्प्लॉयमेंट अभियान के माध्यम से वह राज्य व केंद्र सरकार से यही मांग करते आ रहे हैं कि रोजगार को मोलिक अधिकार बनाया जाए। साथ ही एक रोजगार आयोग का गठन किया जाए,ताकि शिक्षित बेरोजगार युवाओं को उनकी योग्यता के आधार पर रोजगार मुहैया हो सके। लक्षमण यादव ने कहा कि बेरोजगारी देश में सबसे ज्वलंत एवं बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है। उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगार युवाओं का आंकड़ा दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी युवा रोजगार की तलाश में दर-दर की ठोकरें खाने को विवश है। उन्होंने कहा कि केंद्र तथा राज्य सरकारें बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने में विफल साबित हो रही है। यही वजह है कि अदद रोजगार न मिलने की वजह से आज का युवा वर्ग नशे सहित अन्य आपराधिक गतिविधियों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यूथ फॉर राइट टू एम्पलॉयमेंट का मकसद शिक्षित युवाओं को उनके मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। साथ ही देश में निरंतर बढ़ रही बेरोजगारी के खिलाफ एक जनआंदोलन खड़ा करना है,ताकि शिक्षित युवाओं को उनके संवैधानिक अधिकार मिल सके।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में उन्होंने जिला सोलन से अपने जनआंदोलन को शुरू किया है।और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में ये दूसरी बैठक है। आगामी दिनों में यूथ फॉर राइट टू एम्प्लॉयमेंट प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में जाकर कार्यक्रमों का आयोजन करेगी तथा ज्यादा से ज्यादा युवाओं को इस अभियान से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस देश की जीडीपी लगातार बढ़ रही हो उस देश में रोजगार दर में गिरावट चिंता का विषय है। उन्होंने आंकड़ों को सामने रखते हुए कहा कि जनगणना 2011 के मुताबिक देश में बेरोजगारी की दर 2001 के 6.8 फिसदी बढ़कर 2011 में 9.6 फीसदीहो चुकी है।

जहां तक नौकरियों की बात है तो एनएसएसओ के आंकड़े बताते हैं कि पिछली तीमाही में रोजगार दर पिछले कई वर्षों की तुलना में सबसे नीचे है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2010 में 11 लाख नौकरियां सृजित की गई थीं, वहीं वित्त वर्ष 2015 में यह संख्या घटकर 5 लाख पर आ गई है। यही नहीं,बल्कि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा घट कर 91 हजार रह गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र तथा राज्यों में लाखों पद विभिन्न श्रेणियों के रिक्त पड़े हैं,लेकिन उन पदों को भरने की प्रक्रिया लगभग बंद है। जबकि यह सभी पद स्वीकृत है। यानि कि स्वीकृत सभी पदों के लिए वेतन भत्ता वार्षिक बजट में आबंटित होता है। बावजूद इसके इन पदों को सृजित नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि इस राज्य में 900000 से ज्यादा युवा बेरोजगार है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में हिमाचल प्रदेश शिक्षा प्रदान करने के क्षेत्र में चौथे पायदान पर है,लेकिन रोजगार देने में सबसे पीछे है। उन्होंने केंद्र तथा राज्य सरकारों से मांग की है कि रोजगार को मौलिक अधिकार बनाया जाए, केंद्र व राज्यों में रिक्त पड़े लाखा पदों को शीघ्र भरने के लिए एक आयोग का गठन किया जाए, रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाए तथा ठोस सेवा शर्तों को बनाया जाए,जहां सरकारी, अर्ध सरकारी, निजी सभी क्षेत्र समान जवाबदेही और शर्तों से संचालित हो।

इस मौके पर उनके साथ आशीष मिश्रा, संजय पासवान, अनुपम,उपमा,आशीष नेगी, पवन ठाकुर ,जितेंद्र पाल, विक्रम, सुरेश सैनी,अंकित राज, महेश कुमार, नरेश बंसल,अनिल, काल्टा, सहित कई छात्र नेताओं ने भाग लिया ।

Rahul Bhandari

Boasting a rich and dynamic career of over 17 years in journalism, I proudly serve as the Founder, Promoter, and Editor of TheNewsHimachal. Beyond the mere statistics of my extensive coverage, my commitment lies in crafting insightful narratives that traverse the intricate landscapes of politics, socio-economics, education, and grassroots issues. TheNewsHimachal, under my editorial guidance, stands as a beacon of impactful journalism, contributing to informed discussions and catalyzing positive change. My journey encapsulates not just a number but a legacy of shaping meaningful stories that resonate deeply within and beyond the borders of Himachal Pradesh.