हिमाचल भाजपा ने केंद्रीय बजट की कड़ी आलोचना करते हुए कहा की इस बजट में हिमाचल प्रदेश के लिए न तो औद्योगिक पैकेज की घोषणा की गई और न ही 7500 करोड़ रूपये के विशेष आर्थिक पैकेज की मांग को माना गया है। प्रदेश प्रवक्ता डा0 अशोक कपाहटिया के द्वारा जारी वक्तव्य में कहा गया है कि विषम आर्थिक परिस्थितियों में केन्द्रीय वित्त मंत्री पी0 चिदम्बरम के द्वारा पेश किए गए बजट ने आम आदमी विशेषकर मध्यमवर्गीय समाज को पूरी तरह निराश किया है। यूपीए सरकार के शासनकाल में पिछले 9 वर्ष से महंगाई औसतन 10 प्रतिशत की दर से निरंतर बढ़ रही हैं। ऐसी परिस्थिती में आयकर छूट की सीमा 1 लाख तक बढ़ाई जानी चाहिए थी परन्तु ऐसा नहीं हुआ हैं। न्यूनतम स्लैब में 2000 रू0 की छूट ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं।

प्रदेश पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि बजट में बढ़ती महंगाई और गिरती आर्थिक वृद्धि दर को रोकने की दिशा में कोई स्पष्ट नीति अथवा राजनैतिक इच्छा शक्ति नजर नहीं आती। उन्होंने आशंका जताई की आने वाले दिनों में लोगों को न केवल महंगाई अपितु प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष करों की मार से जुझना पड़ेगा। परिणामस्वरूप एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए बचत कर पाना अति कठिन होगा। आम जनता को राहत देने के लिए कम से कम शिक्षा, स्वास्थ्य व आवास पर होने वाले खर्च को आयकर छूट के दायरे में लाना चाहिए था। महंगे शिक्षा लोन के दृष्टिगत इस पर ब्याज की दर में छूट दिए जाने की आवश्यकता थी लेकिन वित्त मंत्री ने युवा विद्यार्थियों को निराश किया हैं।

डा0 कपाहटिया ने कहा कि संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर घटने पर चिंता व्यक्त की गई हैं। परन्तु बजट में कृषि क्षेत्र में खुशहाली लाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं सुझाए गए हैं। यह विडम्बना हैं कि जहां गैर कांग्रेसी राज्यों जैसे गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ आदि में कृषि वृद्धि दर 10 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई हैं वहीं राष्ट्रीय स्तर पर कृषि क्षेत्र की स्थिति निराशाजनक है। खाद्य सुरक्षा के लिए 10 हजार करोड़ का प्रावधान भी आवश्यकता से कहीं कम हैं। उन्होनें कहा कि देश में 70 करोड़ लोग गरीबी रेखा के आसपास निर्वाहन कर रहे हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा के लिए 10 हजार करोड़ का प्रावधान महज घोषणा है। मोबाईल व अन्य इलैक्ट्राॅनिक उपकरण महंगे कर के यूपीए सरकार ने युवाओं के साथ भी न्याय नहीं किया है। देश में व्यवसायी शिक्षा महंगी होती जा रही है और नौकरी व व्यवसाय के अवसर सिकुड़ते जा रहे है। ऐसे में युवाओं को इस बजट से बहुत उम्मीदें थी लेकिन केवल मात्र आश्वासन दिए गए हैं कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं।

प्रदेश भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया की इस बजट से किसानों, बागवानों, कर्मचारियों, व्यवसायियों एवं मध्यमवर्गीय परिवारों-यहां तक कि अमीरों को भी निराशा हुई है।

Previous articleHimachal Govt begins probe into Prashant Bhushan’s land deal
Next articleBRO starts snow clearing on Manali-Leh highway
The News Himachal seeks to cover the entire demographic of the state, going from grass root panchayati level institutions to top echelons of the state. Our website hopes to be a source not just for news, but also a resource and a gateway for happenings in Himachal.