तुम आजाद हो – शर्ते लागू …

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Independence day

#बेबाककलम: एक पंछी को सैयाद ने अपने पिंजरे मे कैद कर रखा था, सभी पंछी कोमुनिटी इस बात से बहुत परेशान थी पंछी कोमुनिटी ने एक निर्णय लिया की इस बाबत सैयाद से बात की जाए । फिर क्या था एक कमेटी गठित की गई उसमे निष्पक्ष तरीके से चुनाव हुए और अपना एक जन प्रतिनिधि चुना गया । जन प्रतिनिधि ने आश्वासन दिया की अब आपका साथी आपके साथ होगा … हम सैयाद की ईंट से ईंट बाजा देंगे । पंछी कोमुनिटी अपनी इस पहल से फुले नहीं समा रही थी मानो जिस क्रांति का बसरो से इंतजार था वो बस आने ही वाली थी । चुने हुए प्रतिनिधि ने सैयाद से मिलने का दिन मुकरर किया और अपना लाव लश्कर लेकर सैयाद के घर जा धमका, बहुत शोर शराबा हुआ पर सैयाद ने एक न मानी पंछी कोमुनिटी के होसले टूटने लगे जन प्रतिनिधि ने मौके की नज़ाकत को समझते हुए सैयाद से बेज़निस डील करने का फेसला किया, फेयनली … पंछी को छोड़ने को सैयाद तेयार हो गया । जन प्रतिनिधि ने छाती ठोक कर इस बात का इलान किया की मैंने आपने साथी को आजादी दिला दी है । हमारा नेता कैसा हो के नारो से नभ फटने लगा खुशी से लोग पागल हुए जा रहे थे । जन प्रतिनिधि ने पंछी कोमुनिटी को समझाया की ये लीगल प्रोसैस है थोड़ा वक्त लगेगा पर ध्रेय रखे ये जल्दी ही हो जाएगा कुछ औपचारिकता बाकी है बस वो हो जाए आप लोग सब आपने घोसले जाए मैं सब निपटा के आता हूँ । जन प्रतिनिधिक के जय जय कार के नारो के साथ सारे पंछी अपने घोसले लौट गए ।

अब समय था डील का जन प्रतिनिधि ने कहा देखा मेरी ताकत को, कितने पंछी मे साथ है मुझे मसीहा मानते है, अब हम बराबर के लोग है तो आराम से बेठ कर बात की जाए। सैयाद ने कहा मुझे तुम्हारे इस पंछी को छोड़ने मे कोई आपत्ति नहीं पर मेरी कुछ शर्ते है :

एक … ये पंछी जो भी काम करे अपनी आमदनी का 10% मुझे देगा ।
दो … कयूंकी इतने साल इसने मेरे भाषा को सीखा है मैंने इतनी मेहनत की है तो ये बाहर जाकर भी मेरी ही भाषा मे बात करेगा ।
तीन … ये भले ही तुम्हारा मसीहा बन जाए मेरे सामने आते ही इसे सर झुकना होगा कयूंकी असली मालिक तो मैं ही हूँ इसका ।
चार … हर शाम को इसे मेरे पास हजारी देने के लिए आना होगा चाहे ये जितनी ही दूर कयून न हो ।
पाँच … जब मेरा मन मनोरंजन करने का हो मैं इसे किसी भी वक्त बुला सकता हूँ और गीत वही गाएगा जो मुझे पसंद है ।

ये पाँच शर्ते है यदि मंजूर हो तो कागजी कार्यवाही करे । जन प्रतिनिधि ने कहा जनाब बिलकुल मंजूर है बस थोड़ा सा मेरा भी इसमे जोड़ दे तो बड़ी मेहरबानी, ताकि आने वाली पीड़ियों को तो याद रहे किस महान पंछी ने इसे आजाद करवाया था ।
आमदनी का 10% आप रखिये 2 % मुझे लेने दीजिये मतलब 12 % ये हमे देगा ।

भाषा भले ही ये आपके बोले पर रोज स्तुति मेरी भी करे।

असली मालिक तो आप ही रहंगे हजूर पर हमारी कोमुनिटी मे केवल मुझे ही सलाम करे और हाँ मुझसे ऊंचा कभी न उड़े ।
हजारी देने के आपके पास आए तो लगे हाथ मेरे घर का समान भी ले आए ।

जब आपके मनोरंजन का साधन बने तो कभी कभार मेरे लिए भी गीत गा ले ।

बस इतनी से आरजू है ग़रीब की । आपकी हर शर्त मजूर है बस मेरी नाक रख लीजिये इसे ले जाकर मेरी धाक बन जाएगी बाकी इसकी किस्मत इसने कौन सा कलेक्टर बन जाना है ठ्हके मरते हुए दोनों ने हाथ मिलाया और जाम का दौर शुरू हो गया , वही पास मे पंछी अपने पिंजरे से टकटकी लगाए उनकी बिसनेस डील देख रहा था और सोच रहा था किसे . किस से – आजादी मिल रही है । शर्तो के साथ कैसी आजादी – जब स्वच्छंद उड़ान का हक नहीं – बोलने का हक नहीं आपने गीत गुंन गुनाने का हक नहीं – ऐसी आजादी की दरकार किसे है । आजादी वो जो बेशर्त हो – जो शर्तो पे हो वो आजादी कहाँ l

आप आजादी कि बात करते है – इस देश को जब तक अफसर शाही से आजादी नहीं मिलती तब तक आजादी केवल छलावा है आज भी हम अंग्रेज़ो की भांति सारे रीति रिवाज निभा रहे है , देश बुरोक्रेट्स के हाथो गुलाम है अपनी ही आजादी के कार्यकर्म को देखने मात्र के लिए धक्के – बेज्जती – क्या गुलामी की परछाई नहीं । अफसर का परिधान अँग्रेजी – मेडम की चाल फिरंगी – भाषा – क्या कहने और गीत रॉक – माँ तुझे सलाम । क्या सच मे सैयाद ने आजाद किया ?

आजादी की बेशर्त उम्मीदों के साथ – स्वतन्त्रता दिवस की शुभकामनाए ।