फिर 2 दिन के लिए खुली रहस्यमयी खज़ाने वाली झील

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कामरूनाग (हिप्र), प्रविंद्र शर्मा: खुल गई खज़ाने वाली झील, जहाँ है दुनिया का सबसे बड़ा खज़ाना… फिर खुला देवतायों का खजाना, फिर उमडा श्रद्धा का सेलाव, फिर हुआ मनोकामना पूर्ति का वायदा, फिर निकला हिमालय का सबसे बडा देवता और फिर लोगों ने दिल खोल कर झील मे डाल दिया सोना चांदी। कमरुनाग जी हाँ… खज़ाने वाली झील एक बार फिर से खुली है। पुरे साल में 14 और 15 जून को यानी देसी महीने के हिसाब से एक तारीख और हिमाचली भाषा में साजा।

गर्मियों के इन दो दिनों में बाबा कमरुनाग पूरी दुनिया को दर्शन देते है। इसलिए लोगों का जन सेलाव पहले ही उमड पड़ता है। क्योंकि बाबा घाटी के सबसे बडे देवता हैं और हर मन्नत पुरी करते हैं। हिमाचल प्रदेश के मण्डी से लगभग 60 किलोमिटर दूर आता है रोहांडा, यहीं से पैदल यात्रा शुरु होती है। कठिन पहाड़ चड़कर घने जंगल से होकर गुजरना पड़ता है। इस तरह लगभग 8 किलोमिटर चलना पड़ता है। तब जाकार आता है कमरुनाग जी का मन्दिर।

कमरुनाग जी का जिक्र महाभारत में भी आता है। इन्हें बबरुभान जी के नाम से भी जाना जाता था। ये धरती के सबसे शक्तिशाली योधा थे। लेकिन कृष्ण नीति से हार गए। इन्होने कहा था कि कोरवों और पांडवों का युद्ध देखेंगे और जो सेना हारने लगेगी में उसका साथ दुंगा। लेकिन भगवान् कृष्ण भी डर गए कि इस तरह अगर इन्होने कोरवों का साथ दे दिया तो पाण्डव जीत नहीं पायेंगे। कृष्ण जी ने एक शर्त लगा कर इन्हे हरा दिया और बदले में इनका सिर मांग लिया। लेकिन कमरुनाग जी ने एक खवाइश जाहिर की कि वे महाभारत का युद्ध देखेंगे। इसलिए भगवान् कृष्ण ने इनके काटे हुए सिर को हिमालय के एक उंचे शिखर पर पहुंचा दिया। लेकिन जिस तर्फ इनका सिर घूमता वह सेना जीत की ओर बढ्ने लगती। तब भगवान कृष्ण जी ने सिर को एक पत्थर से बाँध कर इन्हे पांडवों की तरफ घुमा दिया। इन्हें पानी की दिक्कत न हो इसलिए भीम ने यहाँ अपनी हथेली को गाड कर एक झील बना दी।

यह भी कहा जाता है कि इस झील में सोना चांदी चडाते से मन्नत पुरी होती है। लोग अपने शरीर का कोई भी गहना यहाँ चडा देते हैं। झील पैसों से भरी रहती है, ये सोना – चांदी कभी भी झील से निकाला नहीं जाता क्योंकि ये देवतायों का होता है। ये भी मान्यता है कि ये झील सीधे पाताल तक जाती है। इस में देवतायों का खजाना छिपा है। – हर साल जून महीने में 14 और 15 जून को बाबा भक्तों को दर्शन देते हैं।

झील घने जंगल में है और इन् दिनों के बाद यहाँ कोई भी पुजारी नहीं होता। यहाँ बर्फ भी पड जाती है। इसलिए साल के 9 महिने तो यहाँ के लिए रास्ता भी नहीं होता। – यहाँ से कोई भी इस खज़ाने को चुरा नही सकता। क्योंकि माना जाता है कि कमरुनाग के खामोश प्रहरी इसकी रक्षा करते हैं। एक नाग की तरह दिखने बाला पेड इस पहाड के चारों ओर है। जिसके बारे मे कहते हैं कि ये नाग देवता अपने असली रुप में आ जाता है। अगर कोई इस झील के खजाने को हाथ भी लगाए। – लोग यहाँ मेंढ़े या बकरे की बलि भी देते हैं। यहाँ संतान से सम्बन्धित हर दुआ पुरी होती है। संतान या शादी की मन्नत तो यहाँ सिर्फ एक साल के अंदर ही पुरी हो जाती है। बदले मे आपको बाबा कमरुनाग से बादा करना पड़ता है कि जब आपकी मन्नत पुरी होगी तब आप अपने शरीर का कौन सा गहना झील मे चडा देंगे। इस झील मे दुनिया का सबसे बडा खजाना है। कहते हैं कि इतना सोना – चाँदी तो वर्ल्ड बैंक मे भी नहीं होगा।