कसौली छावनी का कूड़ा बना नाहरी पंचायत के लिए मुसीबत

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कसौली: साल 2008 मे सम्पूर्ण स्वच्छ हो कर निर्मल पंचायत का पुरस्कार ले चुकी निर्मल ग्राम पंचायत नाहरी के सैंकड़ो ग्रामीणों को कसौली छावनी प्रशासन के अड़ियल रवैये के चलते समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कसौली कैंट बोर्ड़ शहर का सारा कूड़ा-कर्कट वर्षों से कसौली-परवानू सड़क पर खुले मे गिरा रहा है, जो बहकर पंचायत क्षेत्र के प्राकृतिक पेयजल स्त्रोतों और रास्तों, उपजाऊ खेतों मे मिल जाता है। ग्रामीणों को आ रही इस समस्या पर निर्मल ग्राम पंचायत नाहरी छावनी प्रशासन के खिलाफ लामबंद हो गया है। महिला मंडलों, युवा मंडलों और ग्रामीणों की मांग पर निर्मल ग्राम पंचायत नाहरी ने इस विषय पर अपनी बैठक मे सर्व-सम्मति से प्रस्ताव पारित कर छावनी प्रशासन को भेजा है और मांग की है कि या तो उस स्थान से डंपिंग साईट कंही और बदल दी जाये या फिर ऐसा प्रावधान किया जाये जिससे गंद नीचे न आये। पंचायत का कहना है कि छावनी द्वारा गिराये जा रहे इस कूड़े से जंहा पंचायत की स्वछता पर ग्रहण लग रहा है वंही पंचायत क्षेत्र मे प्रदेश सरकार द्वारा चलाये जा रहे संपूर्ण स्वच्छता अभियान को भी धक्का लग रहा है।

इस समस्या के समाधान के लिए निर्मल ग्राम पंचायत नाहरी के उप-प्रधान मनमोहन वशिष्ठ मंगलवार को कसौली छावनी के एग्जिक्यूटिव ऑफिसर जेवी सिंह से मिले और उक्त समस्या के समाधान के लिए बातचीत की, जिस पर उन्होंने आश्वासन दिया कि वह खुद डंपिंग साईट का निरिक्षण करेंगे और यदि ऐसा हो रहा है, तो उसके रोकथाम के लिए कोशिश कारगर कदम उठाएंगे। उप-प्रधान ने समस्या से संबंधित पंचायत प्रस्ताव भी कैंट अधिकारी को दिया।

मनमोहन वशिष्ठ ने बताया की इस विषय पर कई सालों से छावनी प्रशासन को बताते आ रहे है, लेकिन समस्या का समाधान नही हुआ है। खुले मे कूड़ा गिराने से बारिश मे कूड़ा बहकर प्राकृतिक पेयजल स्त्रोतों मे मिल जाता है और जलजनित रोगों को के संक्रमित बिमारियों के फेलने का खतरा बन जाता है।