नेट्वर्किंग का मायाजाल …. बकरा हलाल

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(दीपक सुन्द्रियाल) “आज कल क्या कर रहे हो? पैसा कमाना चाहते हो? तों आओ तुम्हे एक बिजनेस के बारे में बताता हूँ” …

सुना सुना सा लग रहा है न …अरे ..अरे … न तों ये सलमान की किसी हिट फिल्म का डायलोग है न कुबेर यंत्र का कोई मन्त्र , ये तों वो दीमक है जो देश के युवाओ को दिप्स्व्पन दिखा कर बर्बाद करने में लगा है | अगर आप रातोरात करोड़पति बनना चाहते हो तों एक यही व्यवसाय है जो आपके सपनो को साकार कर सकता है | जी हाँ हम बात कर रहे है, मल्टी लेवल मार्कटिंग की, जिसे नेटवर्क व्यवसाय, पिरमिड स्कीम, चिट फण्ड, पोंजी स्कीम आप कोई भी नाम दे सकते है |

नेटवर्क व्यवसाय या मल्टी लेवल मार्कटिंग जो की व्यवसाय के दृष्टि कोण से वेध नहीं है आज देश के हर शहर – गावं में पाव पसार चूका है | इस व्यवसाय से जुड़े चंद सकरात्मक सोच वाले लोग़ (जो की अपनी अज्ञानता के चलते स्वयम को सकरात्मक सोच का मानते है ) झूटी कम्पनियो के झांसे में आकर बेरोजगारो का आर्थिक व मानसिक बलात्कार करने में लगे है | इस प्रकार की कम्पनियाँ न केवल लोगो को गुमराह करती है अपितु उनका भविषय भी अंधकारमय कर देती है | आपकी सदस्यता शुल्क के रूप में ये आपसे मोटी रकम एठ लेते है तथा बदले में आपको वह सामान थमा दिया जाता है जो एक मध्य वर्गीय परिवार की जरूरत से कोसो दूर होता है, जो न निगले बने न थूके बने | कोइ पेंनट-कोट कोई कार-वाश, कोइ सोने का ख्वाब, कोइ यंत्र कोइ सर्वे का झुनझुना दे रहा है | आप को इसके अतिरिक्त मिलता है एक बेह्तरीन प्लान पैसे छापने का | एक ऐसा व्यवसाय जिसमे आपार सम्भावनाये है, जिसमे न कोइ आपका मालिक है न नोकर | आप अपने मालिक स्यम है| सब के पास सिमित समय है परन्तु आपके पास सिर्फ अब २४ घंटे नहीं, अनगिनत लोग़ अनगिनत मस्तिक्ष आपके वव्साय को बढाने में दिन रात लगे है | बस करना क्या है अपने जैसे सकारात्मक सोच वाले व पैसे कमाने की इच्छा रखने वाले लोगो को अपने साथ जोड़ना है | 2 से 5 , 8 से 16 और इस तरह आपको पता भी नहीं चलेगा कब आपकी डाउन लाइन में हजारों लोग़ कम कर रहे होंगे, है न कितना आसान … बस पैसे बरसेंगे …आप लम्बी गाड़ी बुक करवा कर रख ले |

इस तरह के व्यवसाय से कितने लोग़ करोड़पति बने है वो आप उँगलियों पर गिन सकते है पर जो इन के झासे में आ कर सब कुछ गवा बेठे है उनकी गिनती लाखो करोडो में है | पिछले कुछ समय से बाजार में मल्टी लेवल मार्केटिंग और चिट फण्ड कंपनियो की बाढ़ आ गई है। ये कंपनिया एक ऐसे समय में आई हैं जब भारत बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहा |

पोंजी स्कीम का इतिहास पुराना है, चार्ल्स डिकंस  के उपन्यास लिठिल डओरिठ 1857 (Little Dorrit),  में इस तरह की स्कीम का वर्णन हैl लेकिन इसे जमीनी हकीकत में लाने वाला सबसे पहला व्यक्ति चार्ल्स पोंजी था , उसका पूरा नाम कारलोस जियेन्नों गिवोवान्नी गुग्लिम्लों टोबाल्डो पोंजी था। 38 वर्ष की उम्र में अमेरिका में कदम रखने वाले पोंजी ने प्रथम विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद यूरोपीय मौद्रिक व विनिमय अव्यवस्था का फायदा उठाया और उसी उद्देश्य से उसने एक स्कीम शुरू की। इस स्कीम में उसने कम समय में प्रत्येक निवेशक को भारी मुनाफे का लालच दिया।

पोंजी ने द सिक्युरिटीज एक्सचेंज कंपनी बनाई भी बनायी, हजारों निवेशकों ने उसमे पैसा लगाया। आखिरकार निवेशकों के लिए पोंजी की यह स्कीम छलावा साबित हुई लोगो के पैसे डूब गए। ये शुरुआत थी पोंजी स्कीम की। पोंजी स्कीम फर्जी तरीके से लोंगों से धन इक्कठा करती है. पैसे लगाने वालो को मिलनेवाला लाभ निवेश के व्यावसायिक निवेश से न होकर बाद में जुडनेवाले लोगो के निवेश से मिलता हैl पिरामिड तरह की एक संरचना बनती है जो अपने ही भार से एक दिन गिर भी जाती है | पिरमिड एक अवैध धंधा है जिसमे पैसे का एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक का केवल घुमाना मात्र है इस श्रृखला में आगे से आगे लोग़ जोड़ कर पैसे का हेर फेर किया जाता है सामान्यता इसमे कोई प्रोडक्ट नहीं होता लेकिन छलावे के लिए कंपनियों द्वारा कुछ प्रोडक्ट जोड़ दिए जाते है ताकि इसे एक व्यवसाय की शकल दी जा सके, गौरतलब है की इस पिरमिड से बाहर शायद ही किसी को ये प्रोडक्ट की जरूरत मासूस होती हो | कंपनी से जुड़ने पर पेयर बनाना अनिवार्य शर्त होती है| ये कंपनियां उत्पाद की बिक्री से ज्यादा लोगों की भर्ती पर विश्वास रखती है | इन कंपनियों में जब निचले स्तर पर जुड़ने वालों की संख्या ज्यादा हो जाती है तो कंपनी भाग जाती हैl वेबसाइट , फोन बंद हो जाते है |

देश में पोंजी स्कीम का जाल ऐसा फेल चूका है की शहर से गावं तक कोई भी आछूता नहीं रहा है | आंध्र प्रदेश , तमिलनाडु , महारष्ट , गोवा , उतराखंड , पंजाब या हिमाचल कोई भी राज्य ऐसी कम्पनिओं के माया जाल से बचा नहीं है, सपीक एशिया, स्टाक गुरु , राम सर्वे जैसे ओन लाइन सर्वे, कुछ हेल्थ के नाम पर अपनी ठगी की दुकानदारी चला रहे है और कुछ ने तो नया और नायब तरीका जैसे सोना बेचने के नाम पर और शुद्ता का हवाला देकर अपना नेटवर्क फैला रखा है और लाखो लोगो को इस धोखाधड़ी पर आधारित काम में जोड़ चुके हैl ऐसा नहीं है की बेरोजगार लोग ही इन् कामो में जुड़े है बल्कि कई आला ऑफिसर यंहा तक की आयकर विभाग के लोग जो शायद लेन देन की कला और इससे जुड़े सभी प्रलोभन से अवगत है इस तरह की स्कीम में जुड़े है और इन् लोगो का काम आसान बना रहे हैl

पिरामिड स्टाइल पर आधारित मार्कटिंग कम्पनियाँ जो की पुरे देश में बे रोक टोक काम कर रही है किसी कठोर कानून के आभाव के कारण पनप रही हैl स्पीक एशिया का सच अभी तक हमारे सामने है पर शायद कानून का आभाव और रातोरात करोड़पति बन्ने के इच्छा के चलते ऐसी कंपनिया खूब चल रही है और शायद आगे भी इस्सी तरह से चलती रहेगीl  

हजारो लोग ठग जाने के बाद भी नेटवर्क मार्कटिंग कम्पनिओं का विरोध नहीं करते , बल्कि कई उदाहरण है की लोगों ने कंपनी के बचाव के लिए विरोध भी किया, जिसका कारण शायद यह है की “यदि बकरा बन गए तों औरो को बकरा बनाओं “की नीति पर चलता है अपना कमीशन लो और मोज करो इसलिए बेवकूफ बनने वाला यह समझते हुए भी वो ठगा जा चूका है विरोध करने के बजाये अन्य लोगों को बेवकूफ बनाकर अपना फंसा पैसा निकालने के जुगाड़ में रहता है|

मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनियों के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई राजस्थान सरकार ने की है. इसके अलावा चेतावनी जारी करते हुए आम नागरिकों से ऐसे किसी कारोबार में शामिल न होने की अपील की हैl राजस्थान सरकार ने प्राइज चिट एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम (बैनिंग) एक्ट 1978 आधार पर मल्टी लेवल मार्केटिंग को प्रतिबंधित किया है, जो पूरे देश में प्रभावी हैl सरकार के द्वारा समय समय पर चेतावनी व आपील जरी की जा रही है ग्राहक ऐसी किसी भी कम्पनी में निवेश न करे जो कम समय में पैसा दुगना –चोगना करने का प्रलोभन दे, न ही किसी नेटवर्क मार्किटग के झांसे में आये | याद रखे की रातोरात आपको कोइ करोड़पति नहीं बना सकता हाँ बकरा बन्ने में चंद मिनिट लगते है, सकारातमक सोच के बकरे से नकारत्मक इन्सान बने रहना ज्यादा उचित है …क्यों की मैं बनुगा करोडपति का मैं .मैं …बकरा जितना भी सकारात्मक क्यों न देखे रहेगा तों बकरा ही … |